- Solaryaan Showcases Hybrid Inverters and Battery Storage Solutions for Homes, Businesses and Industry at REI Expo 2026
- Madhya Pradesh Powers Up Semiconductor Ambitions with MPSEDC–SEMI India MoU and IESA’s Industry ecosystem support.
- Pragya Jaiswal on Working with Sunny Deol in the Upcoming Suryaa: Ant Se Aarambh Tak, Reveals His Off-screen Personality is Different from His On-screen Portrayals
- JEET AI Launches India’s First AI Tutor That Goes Beyond Answers to Actually Teach
- जीत एआई (JEET AI) ने पेश किया भारत का पहला एआई ट्यूटर, जो सिर्फ जवाब नहीं देता, बल्कि पढ़ाता भी है
सिद्धि की ओर चला जिन उपासना का सिद्ध साधक : दीपक जैन (टीनू)
“मूकमाटी” का रचियता आज मूक हो गया।
इंदौर. संत कमल के पुष्प के समान लोकजीवन रूपी वारिधि में रहते हैं, संचरण करता हैं, डुबकियां लगाते हैं, किंतु डूबते नहीं हैं! यही भारत भूमि के प्रखर तपस्वी, वर्तमान युग के महावीर, युग दृष्टा, संपूर्ण जीवलोक के संवाहक, जन जन की आस्था के केंद्र, राष्ट्रसंत, आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन का मंत्रघोष था।
आचार्यश्री ने अपने अमृत वचनों से जनकल्याण में रत व संयम साधना की उच्चतम सीढ़ियों पर आरोहण करते हुए समग्र देश में पद विहार किया. यही सार्थक साधना है कि उन्होंने संपूर्ण भारत भूमि के कण-कण को अपनी पदरज से पावन किया.
जन जन के संत परम पूज्य आचार्य भगवन श्री विद्यासागर जी महामुनिराज ने आज रात 2.30 बजे संल्लेखना पूर्वक समाधि ले ली है। छत्तीसगढ के डोंगरगढ स्थित चन्द्रगिरी तीर्थ पर उन्होंने अंतिम सांस ली है। हम सभी शिष्यवृन्द को यह समाचार किसी वज्राघात की तरह प्राप्त हुआ। संपूर्ण जैन समाज ही नहीं बल्कि भारतीय समाज के साथ-साथ विश्व में महावीर दर्शन को आदर्श मानने वाले प्रत्येक मनुष्य के लिए उन्होंने अपने जीवन का कण कण और क्षण क्षण होम करते हुए आशीष प्रदान किया।
वीतराग परमात्मा के मार्ग पर चलने वाले इस महान पथिक संत का प्रत्येक क्षण जागरूक व आध्यात्मिक आनंद से परिपूर्ण रहा. कठोर तपस्वी, दिगम्बर मुद्रा, अनंत करुणामय हृदय, निर्मल अनाग्रही दृष्टि, स्पष्ट वक्ता के रूप में उनके अनुपम व्यक्तित्व के समक्ष व्यक्ति सहज ही नतमस्तक हो जाते थे.
आचार्यश्री का बाह्म व्यक्तित्व भी उतना ही मनोरम था, जितना अंतरंग. वे त्याग-तपस्या में वज्र से कठोर, मुखमुद्रा में सुख से सौम्यता और कोमलता में पुष्प से परिपूर्ण थे. वे स्वयं के यशोगान से अलिप्त और प्रचार, प्रसार और प्रभाव के आभामंडल से मिलों दूर रहे. उल्लेखनीय यह भी है कि आडम्बर से पृथक रहने के कारण ही वे विहार की दिशा व समय की घोषणा भी नहीं करते थे.
ऐसे महान योगी, साधक, चिंतक, विचारक, लेखक, दार्शनिक ने कन्नड़ भाषी होते हुए भी हिंदी, संस्कृत, प्राकृत, बांग्ला और अंग्रेजी में लेखन किया। जब काव्य, आध्यात्म, दर्शन व युग चेतना के संगम पर प्रकाश डाला तो सर्वाधिक चर्चित काव्य “मूकमाटी” सृजित हो गया. संस्कृति, जन और भूमि की महत्ता को स्थापित करते हुए आचार्यश्री ने इस महाकाव्य के माध्यम से राष्ट्रीय अस्मिता को भी पुनर्जीवित किया.
आचार्यश्री के उपदेश, प्रवचन, वीतराग वाणी, प्रेरणा और आशीर्वाद से चैत्यालय, जिनालय, स्वाध्याय शाला, औषधालय, यात्री निवास की स्थापना हुई और अनेक स्थानों पर निर्माण अनवरत जारी है. मानव सेवा के लिए स्वास्थ्य निःशुल्क सहायता केंद्र चल रहे हैं. जीव व पशु दया की भावना से देश के विभिन्न राज्यों में दयोदय गौशालाएं न केवल स्थापित हुईं, वरन सफलता से संचालित हो रही हैं. महत्वपूर्ण यह भी है कि सामाजिक जनजागरण अभियान किसी दल और समाज तक सीमित नहीं रहे, अपितु इसमें सभी राजनीतिक दल, समाज, धर्माचार्यों और व्यक्तियों की सामूहिक भागीदारी रही, यही आचार्यश्री का प्रारंभिक और प्राथमिक उद्देश्य भी रहा था.
ऐसे तपोनिष्ठ, दृढ़ संयमी, वीतरागी, निःस्पृह, करुणामूर्ति, समदृष्टि-साधु के आदर्श मार्ग पर हम सभी चलने का प्रयास करें, यही उनके प्रति सच्ची आदरांजलि होगी.
|| ॐ शांति ||
दीपक जैन (टीनू)
पूर्व पार्षद
सह मीडिया प्रभारी भाजपा मध्यप्रदेश


